श्रावस्ती का चमत्कार

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काल
लगभग दूसरी शताब्दी ईसा, गंधार कला

मूल स्थान
काबुल के पास (अखंड भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग)

सामग्री
शिस्ट पत्थर (परतदार पत्थर)

आयाम
ऊँचाई : 41.5 सेमी; लंबाई : 40 सेमी; चौड़ाई : 10 सेमी

अवाप्ति सं.
K1/ A23220
भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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श्रावस्ती के चमत्कार में बुद्ध को जुड़वां चमत्कार करते हुए दिखाया गया है, जिसमें उन्‍होंने अपने शरीर से आग और पानी निकाला था और अपनी छवि को कई गुना बड़ाकर अपनी आध्यात्मिक श्रेष्ठता दर्शायी थी। ग्रे शिस्ट में उकेरी गई, इस आकृति में बुद्ध ध्यान मुद्रा में बैठे हैं, उनके चारों ओर छोटे बुद्ध और दिव्य आकृतियाँ हैं। उनके पीछे से प्रकट होती अग्नि ज्‍वाला ज्ञान और श्रेष्ठता का प्रतीक है। यह उभरी हुई नक्काशी गांधार कला का उदाहरण है, जिसमें यूनानी-रोमन प्रकृतिवाद को बौद्ध प्रतीकों के साथ मिलाया गया है और जो बुद्ध की दिव्य शक्ति और शांत, ज्ञानयुक्‍त उपस्थिति को व्‍यक्‍त करती है।

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