बुद्ध के शारीरिक अवशेषों का परिवहन

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काल
लगभग दूसरी शताब्दी ईसा, गंधार कला

मूल स्थान
यूसुफ़ज़ाई (अखंड भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग)

सामग्री
शिस्ट पत्थर (परतदार पत्थर)

आयाम
लंबाई – 49.5 सेमी, चौड़ाई – 4.7 सेमी, ऊँचाई – 20.3 सेमी

अवाप्ति सं
2437/ A23466 (GR – 54)
भारतीय संग्रहालय संग्रह

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गांधार कला-शैली की ‘बुद्ध के भौतिक अवशेषों का परिवहन’ में बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों को ले जाते हुए एक पवित्र जुलूस दिखाया गया है। ग्रे शिस्ट में उकेरी गई इस नक्काशी में अनुयायियों और सेवकों को एक समाधि के पास जाते हुए दिखाया गया है, जिनके साथ राजसी लोग और संगीतकार भी हैं। बारीकी से दर्शाए गए वस्‍त्र, अभिव्‍यक्तिपूर्ण आकृतियाँ और वास्तु-परिवेष्टन इस कृति के गांधार यथार्थवाद को दर्शाती है और बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने के पावन कर्तव्य पर बल देती है। यह कथारूपी नक्काशी भक्ति और आनुष्‍ठानिक भव्‍यता, दोनों को व्‍यक्‍त करती है, जो गांधार बौद्ध कला की विशेषता है।

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