ढक्कन वाला अवशेष पात्र

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काल
मौर्य काल, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व

प्राप्ति स्थान
पिपरावाँ, उत्तर प्रदेश

आयाम
ऊँचाई: 6.1 सेमी; व्यास: 9.3 सेमी

सामग्री
स्टीटाइट (सिलखड़ी)

अवाप्ति संख्या
5564/ A19738 (A & B)

भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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यह गोल अवशेष पात्र बढ़िया सिलखड़ी से बना है और इसमें एक नुकीला नॉब और  गुंबद जैसा ढक्कन है। यह मौर्य काल की कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी चिकनी फिनिश और संतुलित अनुपात कला की बारीकी को दर्शाता हैं। कभी शाक्यमुनि बुद्ध को समर्पित रहा पवित्र रत्नों और जवाहरातों को रखने वाला यह पात्र, श्रद्धा और बौद्ध धर्म की गहन आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

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