यह गोल अवशेष पात्र बढ़िया सिलखड़ी से बना है और इसमें एक नुकीला नॉब और गुंबद जैसा ढक्कन है। यह मौर्य काल की कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी चिकनी फिनिश और संतुलित अनुपात कला की बारीकी को दर्शाता हैं। कभी शाक्यमुनि बुद्ध को समर्पित रहा पवित्र रत्नों और जवाहरातों को रखने वाला यह पात्र, श्रद्धा और बौद्ध धर्म की गहन आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।