अवशेष पात्र

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काल
मौर्य काल, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व

प्राप्ति स्थान
पिपरावाँ, उत्तर प्रदेश

आयाम
ऊँचाई: 20.2 सेमी; केंद्र पर व्यास: 11 सेमी

सामग्री
स्टीटाइट (सिलखड़ी)

अवाप्ति संख्या
5562/ A19738 (A & B)

भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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यह अर्द्ध गोलाकार अवशेष पात्र, जिसमें एक टियर वाला गुंबद वाला ढक्कन है और जिसके ऊपर एक नुकीला कलश है, एक स्तूप के वास्‍तुकीय आकार का स्‍मरण कराता है, जो बुद्ध की पवित्र उपस्थिति का प्रतीक है। पिपरहवा में मिले इस पात्र की पहचान प्राचीन कपिलवस्तु से की जाती है। बारीकी से बनाया गया यह पीस शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों से जुड़े पूजनीय संग्रह का हिस्सा था। इसका सुंदर रूप और प्रतीकात्‍मक बनावट प्रारंभिक बौद्ध रेलिकरी परंपराओं की विशेषता वाली भक्ति कला और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

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