महानविक बुद्धगुप्त की शिलालेख

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काल
लगभग 6वीं शताब्दी ईसा

मूल स्थान
वेल्सली, मलेशिया प्रायद्वीप

सामग्री
पत्थर (संभवतः ज्वालामुखीय मूल)

आयाम
ऊँचाई : 64 सेमी; लंबाई : 33.5 सेमी; चौड़ाई : 11 सेमी

अवाप्ति सं.
MP.1
भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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महानाविका बुद्धगुप्त का शिलालेख, जिसे कैप्टन जेम्स लो ने 1834 ईस्वी में पेनांग में खोजा था, दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के समुद्री और बौद्ध प्रसार-कार्य का एक प्रमुख दस्तावेज़ है। 5वीं-6वीं सदी ई. का यह शिलालेख, लिपि में संस्कृत में लिखा है — यह भारतीय भाषा और दक्षिण-पूर्व एशियाई शिलालेखों का एक दुर्लभ मेल है। इसमें बुद्धगुप्त की रक्तमृतिका (मुर्शिदाबाद) से ताम्रलिप्ति होते हुए मलय प्रायद्वीप के लिए यात्रा का विवरण है, यह पार-समुद्री संस्‍कृति, धार्मिक और बौद्धिक तंत्र को आकार देने में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है।

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