ढक्कन वाला अवशेष पात्र

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काल
मौर्य काल, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व

प्राप्ति स्थान
पिपरावाँ, उत्तर प्रदेश

आयाम
ऊँचाई: 13.5 सेमी;
केंद्र पर व्यास: 14.7 सेमी

सामग्री
स्टीटाइट (सिलखड़ी)

अवाप्ति संख्या
5563/ A19740 (A & B)

भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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गोल आकार का सिलखड़ी अवशेष पात्र, जिसका किनारा फैला हुआ है और ढक्कन फिट है, मौर्य काल की बेहतरीन कारीगरी और खूबसूरती की झलक दिखाता है। यह बढ़िया ग्रे सिलखड़ी से बना है, इसकी चिकनी सतह और संतुलित आकार उस समय के पत्‍थर तराशने के उन्‍नत कौशल को दर्शाता है। यह पात्र, शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों से जुड़े संग्रह का हिस्सा है, जिसमें कभी कीमती रत्न और जवाहरात रखे हुए थे, जो भक्ति, पवित्रता और प्रारंभिक बौद्ध धर्म और कला की सदा रहने वाली विरासत की निशानी के तौर पर एक पूज्‍य पात्र के रूप में उपयोग में लाया जाता था।

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