भूमि स्पर्श मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति पट्टिका

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समय अवधि
12वीं शताब्दी ई. (सुखोथाई और अयुत्थया शैली)

प्राप्ति स्थान
थाईलैंड

आयाम
ऊँचाई – 8.3 सेमी, चौड़ाई – 6 सेमी

सामग्री
धातु

अवाप्ति संख्या
67.178
राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली

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थाई कला में, मन्नत की तख्तियां और पट्टिकाएं बनाने की परंपरा अयुत्या काल से ही एक अहम सांस्‍कृतिक विधा रही है। ये कलाकृतियां न सिर्फ धार्मिक प्रतीक हैं, बल्कि उस काल के आवश्‍यक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के तौर पर भी काम करती हैं। इस विशेष मूर्ति की बनावट, इसके सुसज्जित स्‍थान के साथ, सुखोथाई और अयुत्या दोनों तरह की कला शैलियों का एक सुमेल पद्रर्शित करता है। यह मेल इस समय के दौरान कलात्मक तकनीकों और विषयगत तत्त्व के विकास को दर्शाता है, जो थाईलैंड की समृद्ध कलात्मक विरासत और समय के साथ इसकी निरंतरता को प्रदर्शित करता है। इन चीज़ों में सूक्ष्‍म विवरण और प्रतीकात्‍मक बिम्‍बात्‍मकता कुशल कारीगरी और उस समय के समुदायों के लिए उनके आध्यात्मिक महत्व को दिखाती हैं।

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