एलिज़ाबेथ ब्रूनर – श्वेडागोन पगोडा (पगान) के रक्षक

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कलाकार
एलिज़ाबेथ ब्रूनर

कृति का शीर्षक
स्वेडागोन पगोडा के संरक्षक (पेगन)

काल
20वीं शताब्दी

माध्यम
मैट पर तेल चित्रण

आयाम
चौड़ाई: 79 सेमी, लंबाई: 66 सेमी

अवाप्ति संख्या
16459
राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, नई दिल्ली

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एलिज़ाबेथ ब्रूनर का चित्र म्यांमार के यांगून में मशहूर सुनहरे स्तूप की एक यादगार तस्वीर है,जिसके दोनों ओर पारंपरिक चिन्थे (शेर जैसी रक्षक आकृतियाँ) हैं।  यह कृति पवित्र जगह की विशालता और सुरक्षा प्रदान करने वाले वातावरण को दर्शाता है।

मोटे बुने हुए मैट पर तेल से बना यह कलाकृति, मैट के दिखने वाले बुनावट का इस्तेमाल करके परिदृश्‍य को मिट्टी जैसी, अपार शक्ति और आध्‍यात्मिक गुणता प्रदान करता है। इस स्टाइल की खासियत एक्सप्रेसिव, दृश्‍य ब्रशस्ट्रोक और एक वाइब्रेंट पैलेट है, जो हंगरी में जन्मी ब्रूनर की यूरोपीय कलात्‍मक अनुभूति को बौद्ध प्रतिमा-लक्षण साथ मिश्रित करता है, जिसे उन्होंने एशिया में अपने आवास के दौरान गहनता से अपनाया था।

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