यह पत्थर की मूर्ति एक अप्सरा को दर्शाती है, जिसकी बनावट नाट्यशास्त्र पर आधारित भारतीय कला की सुंदर, घुमावदार शैली (ललित वक्र) में है। उसकी मुद्रा में बहुत गतिशील झुकाव है, जिससे लगता है मानो उसे अत्यंत तीव्र नृत्य के बीच में रोककर स्थिर कर दिया गया हो।मूर्तिकार ने उठे हुए कंधे, झुकी हुई पीठ और मुड़े हुए कूल्हों को उभारकर उसकी शारीरिक सुंदरता और सजीवता पर ज़ोर दिया है। उसके मुड़े हुए पैर और सधी हुई भुजाएँ उसकी मुद्रा में लय और संतुलन लाते हैं। पत्थर की बनी होने के बावजूद, यह नर्तकी बहुत हल्की दिखाई देती है।वह कई गहनों (हार, कुंडल, और मनकों वाली करधनी) से सजी है, जो मूर्तिकार की बारीक कारीगरी और प्राचीन भारत में आभूषणों के महत्व को दर्शाते हैं। उसके सिर पर एक भव्य मुकुट है, जो नीचे की ओर देखती हुई उसकी शांत और सौम्य अभिव्यक्ति को और भी खास बनाता है।