माया का स्‍वप्‍न

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काल
लगभग दूसरी शताब्दी ईसा, गंधार कला

मूल स्थान
मर्दान, पेशावर (अखंड भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग)

सामग्री
शिस्ट पत्थर (परतदार पत्थर)

आयाम
ऊँचाई – 18 सेमी; लंबाई – 27 सेमी; चौड़ाई – 6 सेमी

अवाप्ति सं.
3697/ A23248
भारतीय संग्रहालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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गांधार के ‘माया का स्‍वप्‍न’ रिलीफ में रानी माया देवी को एक पलंग पर लेटे हुए दिखाया गया है, जो तुशिता नामक एक सफेद हाथी- जो बुद्ध के चमत्‍कारी गर्भधारण का प्रतीक है, का स्‍वप्‍न देख रही हैं। ग्रे शिस्ट से बनी यह मूर्ति भारतीय और यूनानी शैली के कलात्मक मेल को दिखाती है, जिसमें क्लासिकल प्रकृतिवाद को बौद्ध कथाओं के विषयों से जोड़ा गया है। रानी के चारों ओर सेवक और दिव्य आकृतियाँ हैं, जो दृश्य के पवित्र महत्व को बढ़ाती हैं। यह रिलीफ गांधार कलाकारों के सुंदर, वास्‍तविक लगने वाले आकारों के जरिए गहनता से धार्मिक प्रतीकों को व्‍यक्‍त करने के कौशल को दर्शाती है।

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