अवशेषों की पूजा

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काल
लगभग दूसरी शताब्दी ईसा, गंधार कला

मूल स्थान
लोऱियान टांगाई (अखंड भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग)

सामग्री
शिस्ट पत्थर (परतदार पत्थर)

आयाम
लंबाई: 39.5 सेमी; चौड़ाई: 7.5 सेमी; ऊँचाई: 25.9 सेमी

अवाप्ति संख्या
5153/ A23266
भारतीय संग्रहालय संग्रह

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गांधार कला-शैली की ‘पुरावशेषों की पूजा’ रिलीफ़ में अनुयायियों को कपड़े से ढके एक रेलीक्वेरी स्तूप को श्रद्धांजलि देते हुए दिखाया गया है, जो बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनकी सदा रहने वाली उपस्थिति का प्रतीक है। ग्रे शिस्ट में उकेरे गए इस दृश्‍य में सुंदर वस्‍त्र पहने लोग श्रद्धा से पुष्‍प अर्पित करते हुए और दिखाए गए हैं। उत्कृष्ट रूप से चित्रित आवरण और वास्तु-परिवेष्टन यूनानी -रोमन प्रभाव को दर्शाती है, जबकि मुख्य स्वरूप गहरी बौद्ध भक्ति दर्शाता है। यह रिलीफ़ गांधार कला के यथार्थवाद और आध्‍यात्मिकता के मिश्रण को दर्शाती है जो पवित्र पूजा पद्धतियों का प्रतीक है।

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