बुद्ध का कपिलवस्तु भ्रमण एवं राहुल का दीक्षा ग्रहण

बुद्ध का कपिलवस्तु भ्रमण एवं राहुल का दीक्षा ग्रहण

इस कलाकृति में बुद्ध के जीवन के दो खास पलों को दिखाता है — कपिलवस्तु की उनकी यात्रा और उनके बेटे राहुल का दीक्षा लेना। बुद्ध, जिन्हें एक प्रभामंडल के साथ दिखाया गया है, यूनानी-बौद्ध शैली में सजी हुई आकृतियों के बीच शांति से खड़े हैं। यह रचना बारीक नक्काशी और वास्‍तविक मुद्रा के ज़रिए […]

अष्टसहस्रिका प्रज्ञापारमिता सूत्र

अष्टसहस्रिका प्रज्ञापारमिता सूत्र

अष्टसहस्रिका प्रज्ञापारमिता सूत्र की ताड़पत्र पांडुलिपि से संबंधित चित्रित आवरण की जोड़ी पाला नेपाल शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पांडुलिपि का लिप्यांकन नेपाल संवत् 470 (1350 ई.) में वज्राचार्य बंधुगुप्त द्वारा, राजा जयर्जुनदेव के शासनकाल में किया गया था। इसकी कलात्मक शैली अजंता भित्तिचित्रों की परंपरा से प्रेरित प्रतीत होती है। मुख्य आवरण चार […]

श्रावस्ती का चमत्कार

श्रावस्ती का चमत्कार

धमचक्र प्रवर्तन मुद्रा में बैठे बुद्ध की मूर्ति, जो पाल काल में बनाई गई थी, सारनाथ में अपना पहला उपदेश देते हुए बुद्ध को दिखाती है। काले बेसाल्ट से बनी, बुद्ध दो कमल वाले सिंहासन पर पालथी मारकर बैठे हैं, उनके दोनों ओर बोधिसत्व और छोटे बुद्ध हैं। उनके हाथ धर्मचक्र मुद्रा बनाते हैं, जो […]

पत्थर की संदूक

पत्थर की संदूक

यह पिपरहवा में पवित्र समाधि-संग्रह के लिए मुख्य पेटिका थी। इसके अंदर खूबसूरती से बना एक अवशेष पात्र ताबूतऔर चार सोपस्टोन के अवशेष पात्र हैं, जिनमें से एक पर ब्राह्मी लिपिमें लिखा है। इससे पता चलता है कि इसमें बुद्धके अवशेष हैं, जिन्हें बुद्ध के सगे-संबंधियों अर्थात शाक्यों ने जमा किया था। शवपेटिका के साथ, […]

मुकुटधारी बुद्ध भूमिस्पर्श मुद्रा में

मुकुटधारी बुद्ध भूमिस्पर्श मुद्रा में

एक मुकुटधारी बुद्ध को विश्‍व पद्मपीठ पर पद्मासन में भूमिस्पर्श मुद्रा में विराजमान दिखाया गया है। — यह ज्ञान प्राप्ति के क्षण का प्रतीक है। यह प्रतिमा एक सुंदर त्रिलोबीय आर्च (त्रिलोकाकार तोरण) वाले मंदिराकार फ्रेम में स्थित है, जिसके चारों ओर बोधि वृक्ष के अलंकरण तथा पुष्प अर्पित करते देवताओं की सजावट है। बुद्ध […]

मुहर

मुहर

ये मृण्मूर्ति कलाकृतियाँ अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं क्योंकि इनमें ब्राह्मी लिपि में महत्वपूर्ण अभिलेख उत्कीर्ण हैं। पुरालेखशास्त्र के गहन विश्लेषण के आधार पर, इन अभिलेखों को कुषाण काल (लगभग दूसरी–तीसरी शताब्दी ईस्वी) का माना जाता है। इनका सर्वाधिक निर्णायक अभिलक्षण इनमें पाया जाने वाला पुनरावृत्त लेख है, जिसका उदाहरण निम्नवत है: “ओम् देवपुत्र विहारे […]

मुहर

मुहर

ये मृण्मूर्ति कलाकृतियाँ अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं क्योंकि इनमें ब्राह्मी लिपि में महत्वपूर्ण अभिलेख उत्कीर्ण हैं। पुरालेखशास्त्र के गहन विश्लेषण के आधार पर, इन अभिलेखों को कुषाण काल (लगभग दूसरी–तीसरी शताब्दी ईस्वी) का माना जाता है। इनका सर्वाधिक निर्णायक अभिलक्षण इनमें पाया जाने वाला पुनरावृत्त लेख है, जिसका उदाहरण निम्नवत है: “ओम् देवपुत्र विहारे […]

एलिज़ाबेथ ब्रूनर – श्वेडागोन पगोडा (पगान) के रक्षक

एलिज़ाबेथ ब्रूनर – श्वेडागोन पगोडा (पगान) के रक्षक

एलिज़ाबेथ ब्रूनर का चित्र म्यांमार के यांगून में मशहूर सुनहरे स्तूप की एक यादगार तस्वीर है,जिसके दोनों ओर पारंपरिक चिन्थे (शेर जैसी रक्षक आकृतियाँ) हैं।  यह कृति पवित्र जगह की विशालता और सुरक्षा प्रदान करने वाले वातावरण को दर्शाता है। मोटे बुने हुए मैट पर तेल से बना यह कलाकृति, मैट के दिखने वाले बुनावट […]

बुद्ध के जीवन-दृश्य

बुद्ध के जीवन-दृश्य

यह शाक्यमुनि बुद्ध के जीवन की पांच खास घटनाएँ दिखाती है , उनका जन्म, त्याग, ज्ञान, पहला उपदेश और महापरिनिर्वाण। नीचे से शुरू होकर, दृश्‍य एक के बाद एक सामने आते हैं: रानी मायादेवी का जन्म देना, महाप्रयाण, मारा की हार, सारनाथ में धर्मचक्र-प्रवर्तन  और आखिर में, बुद्ध का देहांत। सारनाथ शैली की खासियत, ये […]