सिरोभूषा धारण किए हुए मूर्ति

सिरोभूषा धारण किए हुए मूर्ति

इस मूर्ति के सिर पर पंखे के आकार का एक खास मुकुट है और इसके कान भीतर की ओर धँसे हुए (अवतल) हैं। इसकी उभरी हुई आँखें छिद्रों (छेदों) द्वारा दर्शाई गई हैं, और इसमें एक बड़ी नाक और खुले होंठों वाला चौड़ा मुँह है। यह आकृति एक शक्तिशाली और लगभग नाटक जैसा भाव दिखाती […]

स्त्री का शीर्ष

स्त्री का शीर्ष

ऐतिहासिक स्थल पिपरहवा से प्राप्त यह टेराकोटा (मृण्मूर्ति) महिला शीर्ष कुषाण काल (लगभग दूसरी-तीसरी शताब्दी ईस्वी) में फली-फूली कलात्मक शैली का एक ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह कृति अपने “मांसल” यथार्थवाद के कारण तुरंत ध्यान आकर्षित करती है; पूर्व युगों की सपाट और कठोर आकृतियों के विपरीत, इस मुख को कोमल, गोल किनारों और […]

बुद्ध का शीर्ष

बुद्ध का शीर्ष

टेराकोटा (मृण्मूर्ति) से बने बुद्ध के शीर्ष, जो अक्सर अलग-अलग खंडों के रूप में प्राप्त होते हैं, शैलीगत प्रभावों और क्षेत्रीय कलात्मक अभ्यासों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। पिपरहवा से प्राप्त यह युवा बुद्ध शीर्ष अपने घुंघराले बालों, आधी बंद ध्यानस्थ आँखों और शांत अभिव्यक्ति से पहचाना जाता है। इसमें प्रमुख नाक, मोटा निचला […]

भूमि स्पर्श मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति पट्टिका

भूमि स्पर्श मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति पट्टिका

थाई कला में, मन्नत की तख्तियां और पट्टिकाएं बनाने की परंपरा अयुत्या काल से ही एक अहम सांस्‍कृतिक विधा रही है। ये कलाकृतियां न सिर्फ धार्मिक प्रतीक हैं, बल्कि उस काल के आवश्‍यक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के तौर पर भी काम करती हैं। इस विशेष मूर्ति की बनावट, इसके सुसज्जित स्‍थान के साथ, सुखोथाई और अयुत्या […]

त्रिरत्न की पूजा

त्रिरत्न की पूजा

यह गांधार शिस्ट रिलीफ त्रि- रत्न, या तीन रत्नों—बुद्ध, धम्म और संघ की पूजा को दिखाता है। भक्तों और भिक्षुओं को प्र‍तीकात्‍मक चक्र आकृति के चारों ओर श्रद्धा वाले मुद्रा में दिखाया गया है, जो भक्ति और विश्वास पर ज़ोर देता है। पवित्र निशान को उठाए हुए बीच का व्यक्ति बौद्ध धर्म के सिद्धांत के […]

नलगिरि का वशीकरण

नलगिरि का वशीकरण

यह मूर्तिकला बौद्ध परंपरा के उस प्रसंग को दर्शाती है जिसे बुद्ध के चार गौण चमत्कारों में से एक माना जाता है, जो उनकी गहरी करुणा और मैत्री को उजागर करता है। मूर्तिकला में बुद्ध को एक सजावटी तीन-पत्ती वाले ताखे  में खड़ा दिखाया गया है, जबकि एक वश में किया हुआ हाथी उनके चरणों […]

दस भुजाओं वाले लोकेश्वर

दस भुजाओं वाले लोकेश्वर

दक्षिण पूर्व एशियाई कला में, अवलोकितेश्वर को व्यापक रूप से लोकेश्वर के रूप में दर्शाया गया है। एक ऐसी परंपरा जिसने भारत में पाल काल के दौरान अपनी जड़ें जमा लीं। खमेर कला में, लोकेश्वर की प्रतिमा पाल मुहावरे में देखे गए समान प्रतिनिधित्व का अनुसरण करती है। अपने शाही चित्रण में, लोकेश्वर को विश्‍व […]

वैशाली में बंदर द्वारा बुद्ध को मधुपात्र भेंट

वैशाली में बंदर द्वारा बुद्ध को मधुपात्र भेंट

शहद के कटोरे के साथ बैठे बुद्ध की यह मूर्ति, बिहार की है और पाल कला शैली से जुड़ी है। यह काले बेसाल्ट में बेहतरीन कारीगरी का नमूना है। बुद्ध को ध्यान मुद्रा में दिखाया गया है, वे दो कमल के आसन पर शांत भाव से बैठे हैं, जो गहरे ध्यान का प्रतीक है। उनकी […]

बुद्धपाद

बुद्धपाद

यह काले पत्थर का बुद्धपद एक मन्नत स्तूप के गुंबद के नीचे खुदा हुआ है, जिसमें छत्रावली (छतरी वाला कलश) लगाने के लिए ऊपर एक छिद्र है। पवित्र पदचिह्न पर शुभ चिह्न बने हैं, जैसे एक पहिया (चक्र), शंख, एक आसन पर टोंटी वाला बर्तन, सूरज जैसा फूलों का डिज़ाइन, और एक मुकुट जिसके दोनों […]

ललितासन में बुद्ध

ललितासन में बुद्ध

अमिताभ बुद्ध को धर्मचक्र मुद्रा में दिखाया गया है, जो धर्म चक्र के घूमने का प्रतीक है जिसमें वे लटकते हुए पैरों वाली सुंदर मुद्रा में बैठे हैं, जिसे ललितासन कहते हैं। बारीकी से बनी लकड़ी की इस मूर्ति में तीन अलग-अलग हिस्से हैं: मज़बूत आधार खूबसूरती से बना कमल का आसन जो पवित्रता और […]