श्रावस्ती का चमत्कार

श्रावस्ती का चमत्कार

श्रावस्ती के चमत्कार में बुद्ध को जुड़वां चमत्कार करते हुए दिखाया गया है, जिसमें उन्‍होंने अपने शरीर से आग और पानी निकाला था और अपनी छवि को कई गुना बड़ाकर अपनी आध्यात्मिक श्रेष्ठता दर्शायी थी। ग्रे शिस्ट में उकेरी गई, इस आकृति में बुद्ध ध्यान मुद्रा में बैठे हैं, उनके चारों ओर छोटे बुद्ध और […]

 महाभिनिष्क्रमण

 महाभिनिष्क्रमण

महाभिनिष्‍क्रमण रिलीफ में राजकुमार सिद्धार्थ को अपनी आध्‍यात्मिक खोज आरंभ करने के लिए अपने महल से निकलते हुए दिखाया गया है। ग्रे शिस्ट में उकेरे गए इस दृश्‍य में सिद्धार्थ को अपने घोड़े कंथक पर सवार दिखाया गया है, जिसके साथ दिव्य प्राणी और दरबारी हैं। दो दिव्य आकृतियाँ घोड़े के खुरों को उठाए हुए […]

नालंदा तांबे की अनुदान पट्टिका

नालंदा तांबे की अनुदान पट्टिका

इस ताम्रपत्र को वर्ष 1921 में नालंदा में खोजा गया था। इसके अग्रभाग पर बयालीस पंक्तियाँ और पीछे की ओर चौबीस पंक्तियाँ हैं। प्राप्‍त शिलालेख संस्कृत भाषा में प्रारंभिक देवनागरी लिपि में लिखा गया है। शिलालेख गद्य और पद्य में है। मुहर पर शासन करने वाले पाल राजा, ‘श्री देवपालदेवस्य’ या ‘प्रसिद्ध देवपाल’ का नाम […]

सिद्धार्थ का जन्म

सिद्धार्थ का जन्म

नालंदा, बिहार की ‘सिद्धार्थ का जन्म’ रिलीफ को पाल काल के दौरान बनाया गया। इसे बेसाल्ट में उकेरा गया है। इसमें रानी माया देवी को साल वृक्ष की एक डाली पकड़े हुए दिखाया गया है, जबकि शिशु सिद्धार्थ गौतम चमत्कारिक रूप से उनके बगल से प्रकट होते हैं। चारों ओर दिव्य आकृतियाँ और सेवक श्रद्धा […]

स्तूपों वाला भक्ति मुद्रांक

स्तूपों वाला भक्ति मुद्रांक

इस अंडाकार आकार की मन्नत वाली टेराकोटा मुहर को दो भागों में विभाजित किया गया है- ऊपरी भाग में पाँच स्तूपों की एक पंक्ति है और निचले हिस्से में आश्रित उत्पत्ति या प्रतीत्यसमुत्पाद का शिलालेख है। स्तूप बुद्ध के महापरिनिर्वाण और ज्ञान प्राप्ति के विचार का प्रतीक है, इस तरह की मन्नत वाली पट्टिका का […]

माया का स्‍वप्‍न

माया का स्‍वप्‍न

गांधार के ‘माया का स्‍वप्‍न’ रिलीफ में रानी माया देवी को एक पलंग पर लेटे हुए दिखाया गया है, जो तुशिता नामक एक सफेद हाथी- जो बुद्ध के चमत्‍कारी गर्भधारण का प्रतीक है, का स्‍वप्‍न देख रही हैं। ग्रे शिस्ट से बनी यह मूर्ति भारतीय और यूनानी शैली के कलात्मक मेल को दिखाती है, जिसमें […]

अवशेष पात्र

अवशेष पात्र

यह अर्द्ध गोलाकार अवशेष पात्र, जिसमें एक टियर वाला गुंबद वाला ढक्कन है और जिसके ऊपर एक नुकीला कलश है, एक स्तूप के वास्‍तुकीय आकार का स्‍मरण कराता है, जो बुद्ध की पवित्र उपस्थिति का प्रतीक है। पिपरहवा में मिले इस पात्र की पहचान प्राचीन कपिलवस्तु से की जाती है। बारीकी से बनाया गया यह […]

अवलोकितेश्वर और तारा की भक्ति पट्टिका

अवलोकितेश्वर और तारा की भक्ति पट्टिका

यह मृण्मय पट्टिका (टेराकोटा पट्टिका) तीन सुंदर रूप से अलंकृत खंडों (सोकल) में विभाजित है, जिनमें प्रत्येक में बौद्ध परंपरा के एक महत्वपूर्ण प्रतीक या देवत्व का चित्रण किया गया है। ऊपरी खंड में एक स्तूप दर्शाया गया है, जो शांति और ज्ञानोदय (बोधि) का प्रतीक है। एक ओर करुणा के बोधिसत्त्व के रूप में […]